"ये सब लोग कौन है?"
"ये सब दुनियाभर से बिजनेस वाले...चिंटू ने कोडिंग सिखके ऍप बनाया है...तो उसी ऍप में इन्व्हेस्ट करने के लिये आये है..."
पिछले कुछ दिनो से यह ऍड टीवी या सोशल मीडिया पर बहोत ज्यादा चल रहा है और कई पेरेंट्स को कन्फ्युज कर रहा है। मेरे कई दोस्त या पेरेंट्स मुझे फोन करके पूछते हैं कि क्या मैं मेरे बच्चे को इसमे शामिल कर लू? कई लोग यह भी सोचते हैं कि यह सिर्फ एक मार्केटिंग गिमिक है। मैंने सोशल मीडिया पर कई नकारात्मक रिव्हिव्ह इसके बारे मे पढे है। बदलाव लोगो को अच्छा नहीं लगता और लोग उसका शुरुवात में विरोध करते ही है। भले ही कुछ माता-पिता इस बात को स्वीकार करते हैं, लेकिन उनका उत्साह अलग महसूस होता है। कुछ माता-पिता इसे पैसे कमाने का साधन मानते हैं, कुछ इसे अनिवार्य मानते हैं, जबकि कुछ स्टेट्स सिम्बॉल कि तरह कोर्स पूरा करने के बाद सोशल मीडिया पर सर्टिफिकेट अपलोड करते हैं। यह पूरा प्रकार भारत में हमारे कई पेरेंट्स के लिए नया है, इसलिए इस नए विज्ञापन ने काफी सारे पेरेंट्स को अलग ही फिलिंग दि है। लेकिन इस विज्ञापन में कितना भी अतिशयोक्ति क्यों न हो, भविष्य में इस पद्धति की शिक्षाओं की आवश्यकता होगी।
वास्तविक जीवन में पैसा बनाने के अलावा प्रोग्रामिंग के कई लाभ हैं। ये कुछ ऐसे लाभ हैं जो बच्चों को तब मिल सकते हैं जब वे छोटे होने पर प्रोग्रामिंग सीखते हैं, जैसे कि,
१. बच्चों के विचार कंप्यूटर कि तरह शुरू होते हैं। बच्चों को बड़ी समस्याओं को छोटे में विभाजित करने की आदत होती है।
२. प्रोग्रामिंग बहुत सारे लॉजिक पर की जाती है। अंतिम परिणाम को ध्यान में रखते हुए, स्टेप बाय स्टेप, प्रोग्रामिंग किया जाता है, जिससे बच्चे की लॉजिकल थिंकिंग को लाभ मिल सकता है।
३. इसमें क्रिएटिव्हिटी का भी अक्सर उपयोग किया जाता है और यह बच्चों को लाभान्वित करता है।
४. जब प्रोग्रामिंग में कुछ बनाया जाता है, तो यूजर इसका उपयोग करते समय कुछ त्रुटियों (एरर) का सामना कर सकता है। एरर अव्हॉइड के लिए बहुत बच्चो को सावधान रहने की जरूरत होती है, जिससे उनकी सोचने की क्षमता बढ़ सकती है।
५. अगर बनाये गये प्रोग्रॅम में कुछ काम नहीं करता है, तो वह पता लगाने के लिये डटे रेहना पडता है जिससे उनके पेशन्स बढते है।
६. जैसे हम स्टेप बाय स्टेप गणित को हल करके उत्तर तक पहुंचते हैं, वैसे हमें प्रोग्रामिंग में भी परिणाम मिलने लगते हैं। गणित जैसी कुछ एक्सप्रेशन्स का उपयोग इसमे किया जाता है जिससे गणित का प्रॅक्टिकल इम्प्लिमेंटेशन बच्चे समझ सकते है।
७. बच्चे आउट ऑफ दि बॉक्स सोचने के लिये प्रेरित हो जाते है।
इनमें से एक या अधिक लाभ बच्चों को प्रोग्रामिंग सीखने के दौरान मिलते हैं। मैं खुद एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं, इसलिए नरेश नाम के एक मित्र ने मई-जून के दौरान मुझे अमेरिका से कॉल किया था और मुझे भारत में बच्चों के लिए कुछ प्रोग्रामिंग शुरू करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि फॉरेन कन्ट्रीज में बच्चे कम उम्र से ही इन चीजों के आदी हो जाते हैं, इसलिए १०-१२ वर्ष की उम्र तक के बच्चे चैंपियन बन जाते हैं। जिस गति से दुनिया में बदलाव आ रहे है, जिस तरह सेटेक्नॉलॉजी बदल रही है, कुछ वर्षों में एक निश्चित कैरियर नहीं होगा।२००० साल के दौरान, किसी भी माता-पिता ने नहीं सोचा होगा कि मेरा बेटा/बेटी फेसबुक या गूगल में काम करेगा। साथ ही, माता-पिता के मन में बच्चे का आगे क्या करियर होगा, यह सवाल भी जारी रहेगा। अगले कुछ वर्षों में, हम हर क्षेत्र में टेकनॉलॉजी का पूर्ण प्रसार देखेंगे। इसलिए इस तरह की चीजों के लिए कुछ हद तक बच्चों को तैयार करना माता-पिता के लिए एक चुनौती हो सकती है। लेकिन साथ ही, अपने बचपन से बच्चों को वंचित किए बिना,टेकनॉलॉजी के प्रति उनके इंटरेस्ट को ध्यान में रखते हुए, अगले कुछ वर्षों में उन्हें इन चीजों को कुछ हद तक सिखाना आवश्यक होगा। ऍड देते समय खुद को बढ़ावा देना ऍडव्हर्टायजर्स का काम है। ऍड के शिकार ना बनते हुए बच्चो की क्षमताओ और इंटरेस्ट को ध्यान में रखतें हुवे अपने बच्चे को इस तरह की नई चीजों के लिए प्रेरित करना ये आज के समय की जरुरत है।
धन्यवाद,
सुबोध अनंत मेस्त्री